1. Rejection लिखित में, कारण सहित लें
वह policy clause माँगें जिसके आधार पर claim काटा गया — "as per policy terms" कोई कारण नहीं है। जो लिखा ही नहीं, उससे लड़ेंगे कैसे?
2. कारणों को अपनी policy से मिलाएँ
आपकी policy में छपे exclusions, waiting periods और disclosure की शर्तें खुद पढ़ें। कई rejection ऐसे clause पर टिके होते हैं जो आपके मामले पर लागू ही नहीं होते — हर mismatch नोट करें।
3. Insurer के Grievance Redressal Officer को appeal करें
हर insurer का GRO होना ज़रूरी है। सबूतों (discharge summary, bill, doctor notes) के साथ लिखित appeal करें और acknowledgement रखें। तय जवाबी अवधि पूरी होने दें, फिर आगे बढ़ें।
4. IRDAI तक ले जाएँ
हल न निकले तो IRDAI के Bima Bharosa portal पर या toll-free 155255 पर शिकायत दर्ज करें। Regulator के आते ही insurer का रुख़ अक्सर बदल जाता है।
5. Insurance Ombudsman के पास जाएँ
Ombudsman मुफ़्त है, वकील ज़रूरी नहीं, और तय monetary limit तक फैसला insurer पर बाध्यकारी है — मौजूदा limit और अपने शहर का office cioins.co.in पर देखें। Insurer के अंतिम जवाब के एक साल के भीतर फाइल करें।
6. आगे Consumer Commission खुला है
गलत rejection सेवा में कमी (deficiency) है — consumer forum का रास्ता खुला रहता है, खासकर बड़े claims में। प्रक्रिया के लिए हमारी consumer refund गाइड देखें।