1. Seller को लिखित शिकायत करें
Grievance officer को email करें (e-commerce platforms को officer का नाम publish करना ज़रूरी है)। साफ़ deadline दें — 7 से 15 दिन।
2. National Consumer Helpline पर कॉल करें
1915 डायल करें या INGRAM portal इस्तेमाल करें। यह track होता है, इसलिए कई brands यहीं settle कर देते हैं।
3. अपनी consumer complaint तैयार करें
घटनाएँ क्रम से, कमी (deficiency) साफ़ लिखें, और relief की रकम तय करें (refund + मुआवज़ा + खर्च)। Invoice, बातचीत और proof जोड़ें।
4. सही Commission में फाइल करें
₹50 लाख तक District Commission — ₹5 लाख तक filing फीस शून्य है। ज़्यादातर राज्यों में e-daakhil.nic.in से e-filing हो जाती है।
5. सुनवाई में जाएँ और आदेश लागू करवाएँ
सुनवाई काफी सरल होती है; आप खुद पेश हो सकते हैं। आदेश court decree की तरह लागू होते हैं।
काम की बात: Limitation cause of action से 2 साल है — "seller मान जाएगा" की उम्मीद में मामला लटकाए न रखें।
अस्वीकरण: यह गाइड सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। नियम और प्रक्रियाएँ राज्य के अनुसार अलग हो सकती हैं और समय के साथ बदलती भी हैं — अपनी स्थिति के लिए अपना resolution path बनाएँ या verified expert से सलाह लें।